विवाह पंचमी 2026 सोमवार, 14 दिसंबर को है। यह मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी का दिन है, जब जनकपुर में श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस दिन राम-सीता की पूजा और बालकांड का पाठ किया जाता है।
एक नज़र में
- तिथि
- सोमवार, 14 दिसंबर 2026 (कुछ पंचांगों में 13 दिसंबर)
- पक्ष और मास
- मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी
- किसकी पूजा
- श्रीराम और माता सीता
- प्रमुख स्थान
- जनकपुर (नेपाल), अयोध्या, मिथिला क्षेत्र
- पाठ
- श्रीरामचरितमानस, बालकांड का विवाह प्रसंग
विवाह पंचमी 2026 में कब है?
अधिकतर पंचांगों में विवाह पंचमी की तिथि सोमवार, 14 दिसंबर 2026 दी गई है। एक-दो स्रोतों में 13 दिसंबर लिखा है, क्योंकि पंचमी तिथि के लगने और समाप्त होने का समय दोनों दिनों में फैला हो सकता है। पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग से तिथि का समय देखकर उदया तिथि के अनुसार दिन तय करें।
विवाह पंचमी क्या है और इसका महत्व क्या है?
विवाह पंचमी वह पावन दिन है जब मिथिला नरेश राजा जनक की पुत्री सीता जी का विवाह अयोध्या के राजकुमार श्रीराम से हुआ। श्रीरामचरितमानस के बालकांड में जनकपुर के धनुष यज्ञ, शिव धनुष के भंग और फिर विवाह का सुंदर वर्णन मिलता है।
यह पर्व आदर्श दांपत्य का संदेश देता है, जिसमें दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं। जनकपुर में इस दिन भव्य बारात निकलती है और मंदिरों में राम-जानकी का विवाह उत्सव मनाया जाता है। अयोध्या और मिथिला के कई घरों में भी यह दिन उत्सव की तरह होता है।
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
विवाह पंचमी की पूजा विधि क्या है?
- प्रातः स्नान और संकल्पस्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प लें।
- चौकी की स्थापनाचौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएँ। श्रीराम-सीता की प्रतिमा या चित्र रखें।
- शृंगार और अर्पणप्रभु को पीले वस्त्र और सीता माता को लाल चुनरी चढ़ाएँ। रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी दल और मिठाई अर्पित करें।
- बालकांड का पाठरामचरितमानस के बालकांड से राम-सीता विवाह प्रसंग पढ़ें। समय कम हो तो कुछ दोहे-चौपाइयाँ पढ़ लें।
- गठबंधन की परंपराकई घरों में राम और सीता की प्रतिमाओं के वस्त्रों का गठबंधन किया जाता है, फिर आरती होती है।
- आरती और प्रसादश्रीराम की आरती करें और सबको प्रसाद बाँटें। जरूरतमंद को भोजन या वस्त्र दान करें।
जिन परिवारों में विवाह की बात चल रही हो, वे इस दिन श्रद्धा से राम-सीता की पूजा करते हैं। इसे मनोकामना और आशीर्वाद की परंपरा समझें, कोई पक्का वादा नहीं।
क्या विवाह पंचमी पर विवाह करना चाहिए?
यह प्रश्न बहुत पूछा जाता है। कई क्षेत्रों, खासकर मिथिला और नेपाल के हिस्सों में लोक मान्यता है कि इस दिन बेटियों का विवाह नहीं किया जाता, क्योंकि विवाह के बाद माता सीता को वनवास और अनेक कष्ट झेलने पड़े। इसलिए इस तिथि को पूजा-उत्सव का दिन माना जाता है, विवाह का मुहूर्त नहीं।
कुछ अन्य परंपराएँ और पंचांग इस तिथि को शुभ मानते हैं। इसलिए अपने कुल की परंपरा और पंडित जी की सलाह के अनुसार ही निर्णय लें।
2026-27 के शुभ विवाह मुहूर्त की पूरी सूची हमारे अलग लेख में है। दिसंबर के मुहूर्त वहीं देखें।
राम-सीता विवाह की कथा संक्षेप में
राजा जनक ने सीता जी के स्वयंवर में शिव जी का धनुष रखा और घोषणा की कि जो इसे उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता जी का वर होगा। बड़े-बड़े राजा आए, पर कोई धनुष हिला न सका। तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम आगे बढ़े। उन्होंने धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया।
इसके बाद राजा जनक ने अयोध्या संदेश भेजा। राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुँचे। उसी समय चारों भाइयों के विवाह तय हुए। राम-सीता का विवाह मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को संपन्न हुआ। यही प्रसंग हर साल विवाह पंचमी के रूप में याद किया जाता है।
बालकांड में विवाह प्रसंग के मुख्य पड़ाव कौन से हैं?
अगर आप विवाह पंचमी पर पाठ करना चाहते हैं तो इस क्रम में प्रसंग पढ़ सकते हैं। यह रामचरितमानस के बालकांड की कथा-धारा का सार है।
- जनकपुर आगमनश्रीराम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुँचते हैं और नगर देखते हैं।
- पुष्प वाटिकाफुलवारी में पहली बार राम और सीता एक-दूसरे को देखते हैं। सीता जी गिरिजा माता की पूजा करती हैं।
- धनुष यज्ञराजा जनक की सभा में राजाओं के प्रयास विफल होते हैं।
- शिव धनुष भंगगुरु की आज्ञा से श्रीराम धनुष उठाते हैं और वह टूट जाता है।
- बारात और विवाहराजा दशरथ अयोध्या से बारात लाते हैं। वैदिक विधि से विवाह संपन्न होता है।
- विदाईजनकपुर से बारात अयोध्या के लिए प्रस्थान करती है।
जनकपुर और अयोध्या में उत्सव कैसे मनाया जाता है?
नेपाल के जनकपुर स्थित जानकी मंदिर में हर साल हज़ारों श्रद्धालु जुटते हैं। राम-जानकी की बारात निकलती है और रात्रि में विवाह की रस्में निभाई जाती हैं। मंदिर को दीपों और फूलों से सजाया जाता है। अयोध्या के मंदिरों में भी राम-सीता के विवाह का उत्सव मनाया जाता है और मिथिला के कई गाँवों में कीर्तन और भजन-संध्या होती है। घर पर भी आप भजन लगाकर, दीप जलाकर यह उत्सव मना सकते हैं।
श्रीराम-सीता के विवाह से हम क्या सीख सकते हैं?
- सम्मान: राम ने गुरु की आज्ञा के बिना धनुष को हाथ नहीं लगाया। बड़ों का आदर रिश्ते की नींव है।
- संयम: पुष्प वाटिका में प्रेम होने पर भी दोनों की मर्यादा बनी रही।
- साझेदारी: सीता जी ने हर कठिन समय में राम का साथ दिया। विवाह का अर्थ सुख में ही नहीं, कठिनाई में भी साथ रहना है।
- सादगी: दोनों परिवारों ने विवाह को परंपरा और मर्यादा के साथ संपन्न किया, दिखावे के लिए नहीं।
“सीता-राम का विवाह केवल कथा नहीं, मर्यादा और समर्पण का पाठ है।”
विवाह पंचमी पर क्या करें?
- श्रीराम और माता सीता का ध्यान करते हुए “श्री सीताराम” का जप करें।
- रामचरितमानस के बालकांड से विवाह प्रसंग पढ़ें या सुनें।
- घर में छोटा कीर्तन या सुंदरकांड-बालकांड पाठ रखें।
- दंपती साथ बैठकर आरती करें और एक-दूसरे को शुभकामना दें।
- किसी ज़रूरतमंद या अविवाहित कन्या की सहायता करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवाह पंचमी 2026 कब है?
विवाह पंचमी 2026 में सोमवार, 14 दिसंबर को है। कुछ पंचांगों में 13 दिसंबर भी लिखा गया है, इसलिए स्थानीय पंचांग देख लें।
विवाह पंचमी किस महीने में आती है?
यह मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है, जो सामान्यतः नवंबर या दिसंबर में पड़ती है।
विवाह पंचमी पर क्या पढ़ना चाहिए?
श्रीरामचरितमानस के बालकांड में राम-सीता विवाह का प्रसंग पढ़ें। चाहें तो “श्री सीताराम” नाम का जप और आरती भी करें।
क्या विवाह पंचमी पर शादी करना अशुभ है?
मिथिला और नेपाल के कई क्षेत्रों में लोक मान्यता है कि इस दिन विवाह नहीं किया जाता। कुछ परंपराएँ इसे शुभ भी मानती हैं। अपने कुल की रीति और पंडित जी की सलाह लें।
विवाह पंचमी कहाँ सबसे बड़े स्तर पर मनाई जाती है?
जनकपुर (नेपाल) में जानकी मंदिर के आसपास सबसे भव्य उत्सव होता है। अयोध्या और मिथिला क्षेत्र में भी विशेष आयोजन होते हैं।
तिथि हिंदी पंचांग-आधारित स्रोतों से जाँची गई है; स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें। चौपाई श्रीरामचरितमानस (बालकांड) से है। लोक मान्यताएँ क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं। अंतिम जाँच: 17 अक्टूबर 2026। हमारी संपादकीय नीति देखें।
॥ सीता राम, सीता राम ॥

