दिवाली (दीपावली) 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी और धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। कार्तिक मास की अमावस्या की रात दीप जलाने की यह परंपरा सीधे श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ी मानी जाती है।
ध्यान दें: अमावस्या तिथि और लक्ष्मी पूजा का शुभ समय शहर के अनुसार बदलता है। पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से सटीक समय की पुष्टि कर लें।
दिवाली 2026: तारीख एक नज़र में
- धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- दिवाली (लक्ष्मी पूजा): रविवार, 8 नवंबर 2026
- लक्ष्मी पूजा का समय: परंपरा में प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) श्रेष्ठ माना जाता है
- उसके बाद: गोवर्धन पूजा और भाई दूज (तारीख़ें पंचांग से पुष्टि करके देखें)
दिवाली और श्रीराम का संबंध
रामायण की परंपरा के अनुसार, रावण का वध करने और चौदह वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे। अयोध्यावासियों ने अपने प्रिय राजा के स्वागत में पूरे नगर को दीपों से सजाया। उसी स्मृति में आज भी घर-घर दीप जलाए जाते हैं।
वनवास की पृष्ठभूमि समझने के लिए पढ़ें: भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों मिला। दिवाली मनाने के और कारणों पर हमारा पुराना लेख भी देख सकते हैं: दीपावली मनाने का कारण।
दिवाली के पाँच दिन
- धनतेरस: धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी-कुबेर की पूजा, बर्तन या सोना-चाँदी खरीदने की परंपरा।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): दीपदान और घर की सफाई की परंपरा।
- दिवाली: लक्ष्मी-गणेश पूजन और घर-आँगन में दीपमाला।
- गोवर्धन पूजा: श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति और अन्नकूट।
- भाई दूज: भाई-बहन के स्नेह का पर्व।
लक्ष्मी पूजा की सरल विधि
- सफाई और सजावट: पूजा से पहले घर की सफाई करें, द्वार पर रंगोली और तोरण लगाएँ।
- चौकी की तैयारी: साफ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी जी और गणेश जी की प्रतिमा रखें।
- दीप और कलश: घी का दीपक जलाएँ। कलश में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखें।
- पूजन: गणेश जी का पहले पूजन करें, फिर लक्ष्मी जी को कुमकुम, अक्षत, पुष्प और मिठाई अर्पित करें।
- आरती: परिवार के साथ आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- दीपदान: पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, आँगन और तुलसी के पास दीप रखें।
पूजा की पूरी विधि पढ़ें: माता लक्ष्मी जी की पूजा करने की विधि।
इस दिवाली श्रीराम को याद करने के तरीके
- घर में एक दीपक श्रीराम दरबार के सामने जलाएँ।
- परिवार के साथ बैठकर रामायण के अयोध्या-आगमन प्रसंग का पाठ करें।
- बच्चों को “राम राज्य” का अर्थ बताएँ, जैसे न्याय, सत्य और सबके प्रति सम्मान।
- पटाखों में संयम रखें; पर्यावरण और पशुओं का ध्यान रखना भी धर्म का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दिवाली 2026 कब है?
दिवाली 2026 में रविवार, 8 नवंबर को है। धनतेरस इससे दो दिन पहले, 6 नवंबर को पड़ रही है।
दिवाली क्यों मनाई जाती है?
सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि चौदह वर्ष के वनवास और रावण-वध के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे और नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। इसके साथ माँ लक्ष्मी की पूजा की परंपरा भी जुड़ी है।
लक्ष्मी पूजा किस समय करनी चाहिए?
परंपरा में अमावस्या की रात प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय श्रेष्ठ माना गया है। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग से देखें।
क्या दिवाली पर श्रीराम की पूजा भी की जाती है?
हाँ, कई परिवारों में लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ श्रीराम दरबार के सामने भी दीप जलाया जाता है और राम-नाम का स्मरण किया जाता है।
शुभ दीपावली, जय श्री राम। यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य पंचांग-आधारित जानकारी पर आधारित है; पूजा के सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से पुष्टि करें।
यह भी पढ़ें
- दशहरा 2026 कब है
- माता लक्ष्मी जी की पूजा विधि
- दीपावली मनाने का कारण
- दिवाली पहली बार कब मनाई गई थी
- कुबेर जी की कथा
स्रोत और पुष्टि: तिथियाँ प्रचलित पंचांग-गणनाओं (जैसे Drik Panchang) के आधार पर दी गई हैं। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग या पंडित जी से देख लें।
अंतिम जाँच: 14 अक्टूबर 2026। संपादन: शीता राम टीम (संपादकीय नीति)
