धनतेरस 2026 कब है? 6 नवंबर की पूजा विधि, शुभ समय और खरीदारी की सूची
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा होती है। शाम के प्रदोष काल में पूजा करें और…
॥ सियावर रामचंद्र की जय ॥
भक्ति से जुड़ी सबसे ज़्यादा खोजी जाने वाली जानकारी, एक क्लिक में।
यहाँ सभी भगवान के दर्शन भी मिलेंगे और उनकी जानकारी भी। आइए, हमारी वेबसाइट पर सभी भगवान के दर्शन कीजिए और उनकी आरती, चालीसा व कथा पढ़िए।
श्रीराम दरबार
आरती और कथा
हनुमान जी
आरती और कथा
भगवान शिव
आरती और कथा
माँ दुर्गा
आरती और कथा
राधा-कृष्ण
आरती और कथा
श्री गणेश
आरती और कथा
माता लक्ष्मी
आरती और कथा
श्रीराम
आरती और कथा
मेहंदीपुर बालाजी
आरती और कथा
सूर्य देव
आरती और कथा
शनि देव
आरती और कथा
कुबेर जी
आरती और कथा
नवदुर्गा
माँ के नौ रूप
नए पर्व, पूजा विधि और कथाएँ
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा होती है। शाम के प्रदोष काल में पूजा करें और…
निर्मल मन जन सो मोहि पावा।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥
अर्थ
श्रीराम कहते हैं, जो मनुष्य निर्मल मन का होता है, वही मुझे पाता है। मुझे कपट और छल-छिद्र अच्छे नहीं लगते।
जीवन में करें
मन, वचन और कर्म में सच्चाई रखें।
न करें
किसी के साथ छल-कपट न करें।
स्रोत: श्रीरामचरितमानस, गोस्वामी तुलसीदास। हर दिन नई चौपाई।
एक माला में 108 मनके होते हैं। हर बार बटन दबाकर “राम” नाम का स्मरण करें, हर जप पर माला का एक मनका जगमगाएगा। आपकी गिनती केवल आपके फ़ोन या ब्राउज़र में सुरक्षित रहती है।
भगवान के चरणों में मन से एक दीप जलाइए। आपका दीप इस अखंड ज्योति के साथ जुड़ जाएगा।
आज 0 भक्तों ने दीप जलाया · अब तक कुल 1 दीप
आपका दीप प्रभु के चरणों में प्रज्वलित हुआ। ॥ जय सीता राम ॥ परिवार को भेजें
पूरी पूजा, आरती और पुष्प अर्पण करेंघंटी पर क्लिक करके घंटी भी बजा सकते हैं।
एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष व्रत और बड़े पर्व, एक नज़र में।
आने वाला पर्व
दशहरा (विजयादशमी)
20 अक्टूबर 2026 2 दिन शेष
श्रीराम की रावण पर विजय, असत्य पर सत्य की जीत।
पूरी जानकारी पढ़ें
तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय के अनुसार पंचांग से मिलाई गई हैं (अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 तक)। आपके शहर में कुछ व्रतों की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है, इसलिए पूजा का सटीक समय स्थानीय पंचांग या पंडित जी से देखें।
अपनी राशि चुनें और जानें उसका स्वामी ग्रह, आराध्य देव, शुभ दिन और जपने योग्य मंत्र।

मंत्रॐ हं हनुमते नमः
मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़-चने का भोग लगाएँ।

मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
शुक्रवार को माता लक्ष्मी की आरती करें और घर को स्वच्छ रखें।

मंत्रॐ गं गणपतये नमः
बुधवार को गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें।

मंत्रॐ नमः शिवाय
सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाएँ।

मंत्रॐ घृणि सूर्याय नमः
रविवार को सूर्य को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें।

मंत्रॐ गं गणपतये नमः
बुधवार को गणेश जी की पूजा करें और हरे मूँग का दान करें।

मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
शुक्रवार को माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएँ।

मंत्रॐ हं हनुमते नमः
मंगलवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें।

मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
गुरुवार को विष्णु जी की पूजा करें और पीली वस्तु का दान करें।

मंत्रॐ शं शनैश्चराय नमः
शनिवार को हनुमान चालीसा पढ़ें और ज़रूरतमंद की सेवा करें।

मंत्रॐ शं शनैश्चराय नमः
शनिवार को पीपल के नीचे दीप जलाएँ और हनुमान जी को याद करें।

मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम सुनें और केले के पेड़ की पूजा करें।
यह जानकारी लोक-परंपरा पर आधारित है। जन्म-कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें।
भजन, कथा और रोज़ की भक्ति के वीडियो और पोस्ट देखने के लिए हमारे YouTube और Instagram से जुड़ें।
हमारे लेख रामायण, श्रीरामचरितमानस, पुराणों और प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं। तिथि और मुहूर्त एक से अधिक पंचांग-स्रोतों से मिलाए जाते हैं, और पुरानी जानकारी समय पर अपडेट की जाती है।