
मिथिला में इस बार शहनाई सिर्फ 63 दिन बजेगी। बाकी दिन – चाहे कितना भी जल्दी हो – पंडित जी टीका नहीं लगाएंगे। यह कोई अंदाज़ा नहीं, बल्कि अखिल भारतीय मैथिल महासभा की पंडित सभा का सर्वसम्मत फैसला है, जिसमें मिथिला के दो सबसे बड़े पंचांगों – विश्वविद्यालय पंचांग और विद्यापति पंचांग – के पंचांगकारों ने मिलकर 2026-27 की विवाह तिथियां तय की हैं। मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त 2027
अगर आपके घर में भी 2027 में शादी की बात चल रही है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। हम आपको पूरी महीनेवार लिस्ट देंगे, यह भी समझाएंगे कि यह तारीखें कैसे तय होती हैं, और यह भी बताएंगे कि लोग किन गलतियों की वजह से गलत मुहूर्त चुन बैठते हैं।
🔑 मुख्य बातें (Key Takeaways)
- मिथिला पंचांग के अनुसार 2026-27 सीज़न में विवाह के लिए कुल 63 शुभ दिन हैं, जो नवंबर 2026 से जुलाई 2027 तक फैले हुए हैं
- सीज़न देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) के तुरंत बाद शुरू होता है
- सीज़न देवशयनी एकादशी (14 जुलाई 2027) से पहले, चातुर्मास शुरू होने से ठीक पहले खत्म हो जाता है
- मई 2027 में सबसे ज़्यादा (14) मुहूर्त हैं, इसलिए इस महीने वेन्यू-पंडित की बुकिंग जल्दी करनी होगी
- यह तारीखें विश्वविद्यालय पंचांग और विद्यापति पंचांग की संयुक्त सहमति से तय हुई हैं, इसलिए मिथिला क्षेत्र में मान्य हैं
- शहर अनुसार सटीक लग्न-समय बदल सकता है – अंतिम पुष्टि हमेशा अपने पारिवारिक पंडित से करें
इस लेख में: मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त क्या है · तारीखें कैसे तय होती हैं · पूरी महीनेवार लिस्ट · चातुर्मास का असर · अबूझ मुहूर्त · मिथिला बनाम द्रिक पंचांग · सामान्य गलतियां · व्यावहारिक टिप्स · FAQ
मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त क्या होता है?
मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त वह शुभ तिथि और समय है, जो मिथिला क्षेत्र (उत्तर बिहार, नेपाल तराई का मैथिल इलाका) की परंपरा के अनुसार, नक्षत्र, तिथि, वार, लग्न और ग्रहों की स्थिति देखकर विवाह संस्कार के लिए तय किया जाता है। यह पंचांग सूर्य सिद्धांत पर आधारित परंपरा से निकला है और मिथिलांचल के अपने पंडित-सभा तंत्र से हर साल संशोधित होता है।
यहीं से एक बात साफ़ हो जानी चाहिए – मिथिला पंचांग वही चीज़ नहीं है, जो आपको आम तौर पर गूगल पर “द्रिक पंचांग” या ज़्यादातर मोबाइल ऐप्स में मिलती है। बाकी भारत के ज़्यादातर हिस्सों में इस्तेमाल होने वाला पंचांग आधुनिक खगोलीय गणना (Drik/Ayanamsa आधारित) पर चलता है, जबकि मिथिला की अपनी पंडित परंपरा कुछ मामलों में अलग तरीके से गणना करती है। इसी वजह से कभी-कभी मिथिला और बाकी भारत की तारीखों में एक-दो दिन का फर्क आ जाता है – और यही वजह है कि मैथिल परिवार सिर्फ मिथिला पंचांग की तारीख ही मानते हैं, चाहे इंटरनेट पर कुछ और लिखा हो।
मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त 2027 क्यों ज़रूरी है?
शीतारम.इन पर हम कई सालों से मिथिला की पंचांग-परंपरा, विवाह गीत और मुहूर्त संबंधी जानकारी पर काम कर रहे हैं, और हर साल एक ही सवाल दोहराया जाता है – “पंडित जी ने जो तारीख बताई, वो नेट पर मिल रही लिस्ट से मैच नहीं कर रही, सही कौन सी है?” यही कन्फ्यूज़न है जिसे यह लेख दूर करने की कोशिश करता है।
2027 का सीज़न कुछ खास है। बीते सालों की तरह इस बार भी अखिल भारतीय मैथिल महासभा भवन, बलभद्रपुर में एक पंडित सभा हुई – जिसकी अध्यक्षता कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति लक्ष्मी निवास पांडेय ने की, और जिसकी देखरेख ज्योतिष शोध केंद्र, बलभद्रपुर के निदेशक-सचिव पंडित विश्वनाथ झा शास्त्री ने की। इस सभा में विश्वविद्यालय पंचांग के पंचांगकार पंडित रामचंद्र झा और विद्यापति पंचांग के पंचांगकार देवकी नंदन झा – दोनों मौजूद रहे, और सर्वसम्मति से तय हुआ कि दोनों पंचांगों में लग्न-मुहूर्त एक जैसे रहेंगे। यह सभा 1978 से लगातार हो रही है, ताकि मिथिला में पर्व-त्योहार और मुहूर्त को लेकर समाज में असमंजस न बने।
मतलब – जो तारीखें नीचे दी गई हैं, वो किसी एक ब्लॉग या ऐप की गणना नहीं, बल्कि मिथिला के दो सबसे प्रतिष्ठित पंचांगों की आधिकारिक, संयुक्त सहमति हैं।
मिथिला पंचांग में विवाह मुहूर्त कैसे तय होते हैं?
तारीख देखने से पहले यह समझ लेना ज़रूरी है कि पंडित जी लग्न कैसे निकालते हैं। संक्षेप में चार चीज़ें देखी जाती हैं:
- पंचांग शुद्धि – तिथि, वार, नक्षत्र और योग शुभ हों, कोई दोष (जैसे रिक्ता तिथि, भद्रा) न लगा हो
- लग्न शुद्धि – विवाह के समय आकाश में उगने वाली राशि (लग्न) शुभ ग्रहों से युक्त और पाप ग्रहों से मुक्त हो
- गुरु-शुक्र तारा बल – गुरु (बृहस्पति) या शुक्र ग्रह जब अस्त (सूर्य के बहुत पास) होते हैं, तो उस अवधि में सामान्यतः कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं दिया जाता, चाहे बाकी सब कुछ शुभ ही दिखे
- चातुर्मास और मलमास – साल के कुछ महीनों में देवता विश्राम की अवस्था में माने जाते हैं, इसलिए मंगल कार्य पूरी तरह बंद रहते हैं (नीचे विस्तार से)
मिथिला की खास बात यह है कि पंचांग शुद्धि के साथ-साथ लग्न शुद्धि पर भी बहुत ज़ोर दिया जाता है – यानी सिर्फ दिन नहीं, बल्कि उस दिन का ठीक-ठीक समय भी मायने रखता है, और यह शहर-दर-शहर सूर्योदय के हिसाब से थोड़ा बदल जाता है। इसीलिए हर तारीख के लिए अंतिम समय अपने स्थानीय पंडित से ही कन्फर्म करें – यह लेख आपको दिन बताता है, घड़ी नहीं।
मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त 2027 – पूरी महीनेवार सूची
यह वही 63 दिन हैं जो पंडित सभा ने विश्वविद्यालय पंचांग और विद्यापति पंचांग दोनों के लिए एकसमान तय किए हैं।

| महीना | शुभ विवाह तिथियां (2026-27) | कुल दिन |
|---|---|---|
| नवंबर 2026 | 22, 25, 26, 30 | 4 |
| दिसंबर 2026 | 4, 6, 9, 10, 11, 14 | 6 |
| जनवरी 2027 | 18, 24, 28, 29, 31 | 5 |
| फरवरी 2027 | 7, 10, 11, 15, 21, 22, 24, 25, 28 | 9 |
| मार्च 2027 | 1, 3, 4, 10, 11 | 5 |
| अप्रैल 2027 | 10, 21, 23, 25, 28, 29 | 6 |
| मई 2027 | 2, 3, 7, 9, 13, 17, 20, 21, 23, 24, 26, 27, 30, 31 | 14 |
| जून 2027 | 2, 4, 9, 10, 13, 14, 18, 23, 24 | 9 |
| जुलाई 2027 | 1, 2, 7, 8, 9 | 5 |
कुल: 63 शुभ विवाह दिन
ध्यान दें – यह “दिन” हैं, “घड़ी” नहीं। हर तारीख पर पूरे 24 घंटे शुभ नहीं होते; उस दिन के अंदर एक निश्चित लग्न-काल ही विवाह के लिए उपयुक्त होता है, जो शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है। बुकिंग करने से पहले पंडित जी से ठीक समय पूछ लें।
पैटर्न पर एक नज़र: फरवरी और मई सबसे व्यस्त महीने हैं – इन दो महीनों में अकेले 23 दिन (कुल का लगभग एक-तिहाई) आ जाते हैं। जनवरी, मार्च और जुलाई में तारीखें कम हैं, इसलिए इन महीनों में हॉल और बैंड की बुकिंग थोड़ी आसान मिल सकती है, अगर आपको लचीलापन चाहिए।
चातुर्मास 2026-27 और विवाह मुहूर्त पर इसका असर

बहुत से लोग पूछते हैं – “जुलाई के बाद अगली तारीख नवंबर में क्यों?” जवाब है चातुर्मास।
देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) के दिन से माना जाता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि – चातुर्मास – में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मंगल कार्य वर्जित होते हैं। यह अवधि देवउठनी (देवउत्थान/प्रबोधिनी) एकादशी पर खत्म होती है, जब भगवान विष्णु फिर से जागते हैं और मंगल कार्यों की शुरुआत होती है।
2026-27 सीज़न के लिए यह टाइमिंग इस तरह बैठती है:
| पर्व | तारीख | महत्व |
|---|---|---|
| देवउठनी एकादशी 2026 | 20 नवंबर 2026 | चातुर्मास समाप्त, विवाह सीज़न शुरू |
| देवशयनी एकादशी 2027 | 14 जुलाई 2027 | नया चातुर्मास शुरू, विवाह सीज़न बंद |
यही वजह है कि ऊपर की लिस्ट में विवाह की पहली तारीख 22 नवंबर 2026 है (देवउठनी के दो दिन बाद) और आखिरी तारीख 9 जुलाई 2027 है (देवशयनी से पांच दिन पहले)। बीच के चार महीने (जुलाई-नवंबर) पूरी तरह खाली हैं – इसलिए नहीं कि कोई गणना छूट गई, बल्कि इसलिए कि उस दौरान मुहूर्त देना ही परंपरा में नहीं है।
अबूझ मुहूर्त – क्या इन पर पंचांग देखने की ज़रूरत नहीं?
उत्तर भारत की कई परंपराओं में वसंत पंचमी, अक्षय तृतीया और विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी) को “अबूझ” या स्वयंसिद्ध शुभ मुहूर्त माना जाता है – यानी इन दिनों अलग से पंचांग देखने की ज़रूरत नहीं, ये अपने आप में शुभ हैं। वसंत पंचमी 2027 फरवरी की शुरुआत में पड़ रही है (सटीक तिथि पंचांग-भेद से एक दिन आगे-पीछे हो सकती है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें)।
लेकिन एक बात साफ़ रखना ज़रूरी है – मिथिला की पंडित-परंपरा में भी इन दिनों को शुभ माना जाता है, पर ज़्यादातर मैथिल परिवार फिर भी लग्न शुद्धि के लिए पंडित जी से समय पूछते ही हैं, क्योंकि “दिन शुभ है” और “इस घड़ी विवाह करना शुभ है” – यह दो अलग बातें हैं। तो अबूझ मुहूर्त को बैकअप विकल्प की तरह देखें, पूरी तरह पंचांग-मुक्त फैसले की तरह नहीं।
मिथिला में विवाह के साथ जुड़े दूसरे संस्कारों के शुभ दिन
विवाह के अलावा, इस साल की पंडित सभा ने मिथिला में होने वाले बाकी संस्कारों की तारीखें भी एक साथ तय की – यह जानना काम का है क्योंकि मैथिल विवाह में यह सब आगे-पीछे साथ चलते हैं।
| संस्कार | कुल शुभ दिन | अवधि |
|---|---|---|
| विवाह | 63 | नवंबर 2026 – जुलाई 2027 |
| द्विरागमन (गौना) | 27 | नवंबर 2026 – मई 2027 |
| मुंडन | 22 | नवंबर 2026 – जुलाई 2027 |
| गृहारंभ | 19 | अक्टूबर 2026 – जून 2027 |
| गृहप्रवेश | 18 | अक्टूबर 2026 – जुलाई 2027 |
| देवादिप्रतिष्ठा | 18 | जनवरी – जुलाई 2027 |
| उपनयन | 14 | फरवरी – जुलाई 2027 |
जिन परिवारों में विवाह के साथ द्विरागमन या मुंडन भी करवाना है, उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि द्विरागमन की तारीखें विवाह से अलग गिनी जाती हैं – इसकी सटीक तारीख अपने पंडित से विवाह के साथ ही तय करवा लें, ताकि दोनों की प्लानिंग एक साथ हो सके।
सौराठ सभा (गाछी) – मिथिला की अनोखी विवाह-परंपरा

अगर आप मिथिला के बाहर से हैं, तो यह जानकर दिलचस्पी होगी – मिथिला में सिर्फ पंचांग से मुहूर्त तय नहीं होता, बल्कि सौराठ गांव (मधुबनी) में हर साल एक “सौराठ सभा” या “गाछी” लगती है, जहां परंपरागत रूप से मैथिल ब्राह्मण परिवार आमने-सामने मिलकर कुंडली और वर-वधू का मिलान करते हैं। 2027 के लिए यह सभा 1 जुलाई से 9 जुलाई 2027 तक आयोजित होगी – यानी ठीक विवाह सीज़न के आखिरी हफ्ते में, चातुर्मास शुरू होने से पहले। सदियों पुरानी यह परंपरा अब सीमित रूप में ही चलती है, पर मिथिला की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है।
मिथिला पंचांग और द्रिक पंचांग के विवाह मुहूर्त में अंतर क्यों?
बहुत से लोग गूगल पर “विवाह मुहूर्त 2027” खोजते हैं और drikpanchang.com जैसी साइट्स पर पूरे भारत के लिए बनी एक सामान्य लिस्ट देखकर उसी को मान लेते हैं। समस्या यह है कि वह लिस्ट ज़्यादातर उत्तर भारत की सामान्य पद्धति और आधुनिक खगोलीय गणना पर आधारित है, जबकि मिथिला की परंपरा अपनी अलग पंचांग-प्रणाली और स्थानीय पंडित-सभा के फैसले से चलती है।
| बिंदु | मिथिला पंचांग | सामान्य/द्रिक पंचांग |
|---|---|---|
| तय कैसे होता है | पंडित सभा (अखिल भारतीय मैथिल महासभा) की सहमति से | खगोलीय सॉफ्टवेयर गणना से |
| लागू क्षेत्र | मिथिलांचल (उत्तर बिहार, नेपाल तराई) | पूरा भारत |
| तारीखों में फर्क | कुछ तारीखें मैच करती हैं, कुछ 1-2 दिन आगे-पीछे | पैन-इंडिया औसत |
| कौन माने | मैथिल ब्राह्मण व सामान्य मैथिल परिवार | बाकी भारत के हिंदू परिवार |
नतीजा सीधा है – अगर आपका परिवार मैथिल परंपरा मानता है या पंडित जी मिथिला पंचांग देखते हैं, तो इस लेख की तारीखें ही आपके लिए हैं। अगर आप उत्तर भारत की सामान्य द्रिक पंचांग परंपरा मानते हैं, तो अलग लिस्ट देखनी होगी – दोनों को मिलाना सबसे बड़ी गलती है, जो अगले सेक्शन में हम कवर कर रहे हैं।
विवाह मुहूर्त चुनते समय होने वाली सामान्य गलतियां
- दो पंचांगों की तारीखें मिला देना – मिथिला पंचांग की तारीख देखकर सोचना कि यह पूरे भारत में लागू होगी, या इसका उल्टा
- कुंडली मिलान के बिना सिर्फ तारीख पकड़ लेना – कोई भी तारीख कितनी भी शुभ हो, वर-वधू की कुंडली का गुण मिलान ज़रूरी है
- शहर का सूर्योदय-समय अनदेखा करना – दिल्ली और दरभंगा के सूर्योदय में फर्क है, इसलिए लग्न-समय भी बदल जाता है
- गुरु-शुक्र अस्त काल में तारीख पकड़ लेना – ऑनलाइन कैलेंडर में तारीख दिख जाती है, पर उस समय गुरु या शुक्र अस्त हो तो पंडित जी वह मुहूर्त नहीं देते
- वेन्यू पहले, मुहूर्त बाद में – पहले हॉल बुक करके बाद में पंडित से तारीख पूछना, जबकि होना इसका उल्टा चाहिए
- मई जैसे व्यस्त महीने में आखिरी वक्त बुकिंग – 14 तारीखों वाले महीने में हॉल-बैंड सबसे पहले बुक होते हैं
- चातुर्मास के आसपास की तारीख भूल जाना – जुलाई के बाद की जो तारीख “अगली उपलब्ध” लगती है, वह अक्सर नवंबर में ही होती है
परिवारों के लिए व्यावहारिक टिप्स
- मई-फरवरी के लिए 3 महीने पहले बुकिंग शुरू करें – यही सबसे भारी महीने हैं, हॉल-केटरर-बैंड सबसे पहले भर जाते हैं
- 2-3 बैकअप तारीखें रखें – कभी घर में किसी वजह से पहली पसंद की तारीख छोड़नी पड़े, तो नज़दीकी विकल्प तैयार रहे
- लग्न का समय लिखवा कर रखें – सिर्फ “10 फरवरी” काफी नहीं, “10 फरवरी, दोपहर 12:15 से 1:05 तक” जैसा सटीक समय पंडित जी से लिखवाएं
- द्विरागमन की तारीख विवाह के साथ ही तय करें – बाद में अलग से भागदौड़ करने से बचेंगे
- कुल मुहूर्त लिस्ट प्रिंट करके रखें – रिश्तेदारों से तारीख कन्फर्म करने में बार-बार फोन नहीं करना पड़ेगा (नीचे डाउनलोड लिंक दिया गया है)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
2027 में मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह के लिए कुल कितने दिन शुभ हैं?
मिथिला पंचांग की 2026-27 पंडित सभा के अनुसार विवाह के लिए कुल 63 शुभ दिन हैं, जो नवंबर 2026 से जुलाई 2027 के बीच फैले हुए हैं। यह विश्वविद्यालय पंचांग और विद्यापति पंचांग दोनों में एकसमान माने गए हैं।
मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त 2027 की शुरुआत कब से हो रही है?
सीज़न 22 नवंबर 2026 से शुरू हो रहा है, जो देवउठनी एकादशी (20 नवंबर 2026) के दो दिन बाद पड़ता है। इसी दिन से चातुर्मास खत्म होकर मंगल कार्य फिर से शुरू होते हैं।
यह मुहूर्त कब खत्म होते हैं और उसके बाद शादी क्यों नहीं होती?
आखिरी शुभ दिन 9 जुलाई 2027 है। इसके पांच दिन बाद, 14 जुलाई 2027 को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है, जिसमें विवाह जैसे मंगल कार्य वर्जित माने जाते हैं।
फरवरी 2027 में विवाह के लिए कौन सी तारीखें शुभ हैं?
फरवरी 2027 में 7, 10, 11, 15, 21, 22, 24, 25 और 28 तारीख शुभ मानी गई हैं – यानी कुल 9 दिन, जो इस साल के सबसे व्यस्त महीनों में से एक है।
मई 2027 में इतने ज़्यादा मुहूर्त क्यों हैं?
मई में नक्षत्र-ग्रह की स्थिति और गुरु-शुक्र की चाल इस साल विवाह के लिए ज़्यादा अनुकूल बैठ रही है, इसलिए इस महीने अकेले 14 शुभ दिन मिले हैं – पूरे सीज़न का सबसे बड़ा हिस्सा।
मिथिला पंचांग और सामान्य/द्रिक पंचांग के विवाह मुहूर्त अलग क्यों होते हैं?
मिथिला पंचांग स्थानीय पंडित-सभा की सहमति और परंपरागत गणना पद्धति से तय होता है, जबकि द्रिक पंचांग आधुनिक खगोलीय गणना पर आधारित पैन-इंडिया लिस्ट देता है। दोनों की पद्धति अलग होने से कुछ तारीखें एक-दो दिन आगे-पीछे हो जाती हैं।
क्या अबूझ मुहूर्त पर पंचांग देखने की ज़रूरत नहीं होती?
वसंत पंचमी, अक्षय तृतीया जैसे दिन परंपरागत रूप से स्वयंसिद्ध शुभ माने जाते हैं, पर मिथिला में भी ज़्यादातर परिवार लग्न का सटीक समय पंडित जी से ही तय करवाते हैं, ताकि दिन के साथ घड़ी भी शुभ रहे।
सौराठ सभा क्या है?
सौराठ सभा (गाछी) मिथिला की एक पुरानी परंपरा है, जहां सौराठ गांव में मैथिल ब्राह्मण परिवार मिलकर कुंडली-मिलान करते हैं। 2027 में यह सभा 1 से 9 जुलाई तक, यानी सीज़न के आखिरी हफ्ते में आयोजित होगी।
विवाह मुहूर्त तय करते समय क्या-क्या ज़रूर देखना चाहिए?
तारीख के अलावा कुंडली मिलान, शहर का लग्न-समय, गुरु-शुक्र अस्त की स्थिति और परिवार की अपनी परंपरा (मिथिला या अन्य) – यह सब मिलकर सही मुहूर्त तय करते हैं, सिर्फ तारीख काफी नहीं है।
क्या ये तारीखें सभी शहरों के लिए एक समान लागू होती हैं?
दिन एक समान रहता है, पर उस दिन का सटीक लग्न-समय शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के हिसाब से थोड़ा बदल जाता है। इसलिए दिन यहां से लें, पर घड़ी अपने शहर के पंडित से कन्फर्म करें।
निष्कर्ष
मिथिला पंचांग विवाह मुहूर्त 2027 की पूरी तस्वीर साफ़ है – 63 शुभ दिन, नवंबर 2026 से जुलाई 2027 तक, फरवरी और मई सबसे व्यस्त महीने। यह तारीखें किसी एक साइट की गणना नहीं, बल्कि मिथिला के दो सबसे बड़े पंचांगों की पंडित सभा में हुई सहमति हैं। लेकिन दिन जितना भी शुभ हो, अंतिम फैसला हमेशा अपने पारिवारिक पंडित से सटीक समय पूछकर ही लें – यही मिथिला की सदियों पुरानी परंपरा भी कहती है।
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लेखक: शीतारम.इन संपादकीय टीम – मिथिला की पंचांग-परंपरा, विवाह गीत और मुहूर्त संबंधी कंटेंट पर लंबे समय से काम कर रही टीम।
अंतिम अपडेट: सितंबर 2026
स्रोत आधार: अखिल भारतीय मैथिल महासभा की पंडित सभा (अप्रैल 2026) का सार्वजनिक निर्णय; नीचे External Links में पूरे स्रोत दिए गए हैं।
