मिथिला पंचांग क्या है? 2026 में जानिए इसका महत्व और उपयोग | Mithila Panchang Guide

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Mithila Panchang kya hai
Mithila Panchang kya hai

भारतीय संस्कृति में पंचांग का विशेष महत्व है। जहां पूरे देश में विभिन्न प्रकार के पंचांग प्रचलित हैं, वहीं मिथिला पंचांग अपनी अनूठी पहचान और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि हमारी सनातन परंपरा का वह अमूल्य ज्ञान है जो हमें शुभ मुहूर्त, व्रत-त्यौहार और धार्मिक अनुष्ठानों की सटीक जानकारी देता है।

इस comprehensive guide में हम विस्तार से जानेंगे कि मिथिला पंचांग क्या है, इसकी विशेषताएं, महत्व और आधुनिक समय में इसका उपयोग कैसे करें। चाहे आप धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हों, शादी का मुहूर्त देख रहे हों या फिर किसी शुभ कार्य की तिथि निर्धारित करनी हो – मिथिला पंचांग आपका सबसे विश्वसनीय साथी है।

मिथिला पंचांग क्या है? (What is Mithila Panchang?)

मिथिला पंचांग बिहार और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में प्रचलित एक प्राचीन और अत्यंत शुद्ध हिंदू कैलेंडर सिस्टम है। ‘पंचांग’ शब्द संस्कृत के ‘पंच’ (पांच) और ‘अंग’ (भाग) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पांच अंगों वाला।

मिथिला पंचांग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी astronomically accurate calculations हैं। यह पंचांग वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों पर आधारित है और सूर्य-चंद्रमा की गतिविधियों, नक्षत्रों की स्थिति और ग्रहों की चाल को सटीक रूप से दर्शाता है।

पंचांग के पांच अंग (Five Elements of Panchang)

प्रत्येक पंचांग में पांच मुख्य तत्व होते हैं जो दैनिक जीवन में धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं:

1. तिथि (Tithi): चंद्रमा की गति के आधार पर निर्धारित होने वाली lunar day। एक पक्ष में 15 तिथियां होती हैं – शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से पूर्णिमा तक और कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या तक। मिथिला पंचांग में तिथि की गणना अत्यंत सूक्ष्मता से की जाती है।

2. वार (Vara/Day): सप्ताह का दिन – रविवार से शनिवार तक। प्रत्येक वार का अपना विशेष देवता और महत्व है। मंगलवार को मंगल देव, बुधवार को बुध, गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा का विशेष महत्व है।

3. नक्षत्र (Nakshatra): 27 नक्षत्रों में से कौन सा नक्षत्र प्रभावी है। अश्विनी से रेवती तक, प्रत्येक नक्षत्र का अपना विशेष गुण और प्रभाव होता है। शुभ कार्यों के लिए रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी आदि नक्षत्र अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

4. योग (Yoga): सूर्य और चंद्रमा के combined movement से बनने वाले 27 योग। विष्कम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, ऐन्द्र और वैधृति – ये सभी योग विभिन्न कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

5. करण (Karana): तिथि का आधा भाग। एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं जिनमें बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किंस्तुघ्न शामिल हैं। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं जो अशुभ माना जाता है।

मिथिला पंचांग का इतिहास और उत्पत्ति (History & Origin)

मिथिला क्षेत्र भारतीय ज्ञान और विद्या का प्राचीन केंद्र रहा है। यहां की धरती पर महर्षि याज्ञवल्क्य, महर्षि गौतम, माता सीता और राजा जनक जैसी महान विभूतियों ने जन्म लिया। मिथिला पंचांग की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है और यह वैदिक ज्योतिष के शुद्धतम रूप को प्रस्तुत करती है।

प्राचीन काल में मिथिला के विद्वान पंडितों ने astronomical observations के आधार पर इस पंचांग को विकसित किया। यहां के ज्योतिषियों ने सूर्य सिद्धांत, आर्यभट्टीय और सूर्य सिद्धांत जैसे प्राचीन ग्रंथों का गहन अध्ययन कर मिथिला पंचांग को अत्यंत सटीक बनाया।

मिथिला का नाम राजा मिथि के नाम पर पड़ा था जो सूर्यवंशी राजा थे। यह क्षेत्र आज बिहार के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और नेपाल के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है। इस पूरे क्षेत्र में मिथिला पंचांग को सबसे प्रामाणिक और शुद्ध माना जाता है।

मिथिला पंचांग की विशेषताएं (Unique Features)

1. Astronomical Accuracy (खगोलीय शुद्धता)

मिथिला पंचांग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी खगोलीय शुद्धता है। यह सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक गति, ग्रहों की स्थिति और नक्षत्रों के प्रभाव को बेहद सटीकता से दर्शाता है। Modern astronomical calculations से तुलना करने पर भी मिथिला पंचांग की गणनाएं लगभग 100% सटीक पाई जाती हैं।

2. मैथिली भाषा में प्रस्तुति

पारंपरिक मिथिला पंचांग मैथिली भाषा में लिखे जाते हैं, जो मिथिला क्षेत्र की मातृभाषा है। हालांकि आधुनिक समय में हिंदी और अंग्रेजी में भी मिथिला पंचांग उपलब्ध हैं। मैथिली लिपि में लिखे पंचांग अपनी सांस्कृतिक प्रामाणिकता के लिए जाने जाते हैं।

3. विस्तृत मुहूर्त विवरण

मिथिला पंचांग में प्रत्येक दिन के शुभ और अशुभ मुहूर्त का विस्तृत विवरण दिया जाता है। राहु काल, यम घंटक, गुलिक काल, विष्टि करण (भद्रा) के समय की सटीक जानकारी इसमें मिलती है। इसके अलावा चौघड़िया मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल की भी पूरी जानकारी दी जाती है।

4. त्योहारों और व्रतों की सूची

मिथिला पंचांग में वर्ष भर के सभी महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों, व्रतों और उत्सवों की विस्तृत सूची होती है। छठ पूजा, दुर्गा पूजा, होली, दिवाली, जन्माष्टमी, रामनवमी जैसे बड़े त्योहारों के साथ-साथ स्थानीय त्योहारों जैसे सामा-चकेवा, जितिया, तीज आदि की भी जानकारी इसमें मिलती है।

5. Regional Relevance (क्षेत्रीय प्रासंगिकता)

मिथिला पंचांग मिथिला क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, longitude और latitude को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। इस कारण सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय और अन्य खगोलीय घटनाओं का timing बिल्कुल सटीक होता है। यही कारण है कि मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए यह सबसे reliable पंचांग है।

मिथिला पंचांग का महत्व (Importance of Mithila Panchang)

आधुनिक युग में भले ही हमारे पास digital calendars और smartphones हों, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए पंचांग की आवश्यकता आज भी उतनी ही है जितनी पहले थी। विशेष रूप से मिथिला पंचांग का महत्व निम्नलिखित कारणों से और भी बढ़ जाता है:

धार्मिक अनुष्ठानों में

किसी भी शुभ कार्य – चाहे वह पूजा-पाठ हो, यज्ञ हो या कोई संस्कार – के लिए सही मुहूर्त का चयन अत्यंत आवश्यक है। मिथिला पंचांग न केवल शुभ मुहूर्त बताता है बल्कि अशुभ समय से भी बचने में मदद करता है। राहु काल, विष्टि करण (भद्रा) और यम घंटक जैसे अशुभ समय की जानकारी से हम अपने महत्वपूर्ण कार्यों को इन समयों से बचा सकते हैं।

विवाह और मुहूर्त में

भारतीय परंपरा में विवाह सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। शादी का मुहूर्त निकालने के लिए मिथिला पंचांग का उपयोग अत्यंत लाभकारी है। यह न केवल लग्न का शुभ समय बताता है बल्कि वर-वधू की कुंडली मिलान के लिए भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। विवाह के अलावा सगाई, तिलक, हल्दी जैसे अन्य शुभ कार्यों के लिए भी मुहूर्त देखा जाता है।

व्रत और उपवास में

एकादशी, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि, करवा चौथ जैसे महत्वपूर्ण व्रतों की सही तिथि और समय जानने के लिए मिथिला पंचांग अत्यंत उपयोगी है। कभी-कभी तिथि क्षय या तिथि वृद्धि की स्थिति होती है, ऐसे में किस दिन व्रत करना चाहिए – यह जानकारी पंचांग से ही मिलती है। पारण का सही समय (व्रत खोलने का समय) भी पंचांग में स्पष्ट रूप से दिया जाता है।

कृषि कार्यों में

मिथिला मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है। प्राचीन काल से ही किसान खेती-बाड़ी के कार्यों के लिए पंचांग का उपयोग करते आए हैं। बुवाई, रोपाई, सिंचाई, कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के लिए शुभ समय और नक्षत्र देखना आज भी प्रचलित है। मिथिला पंचांग मौसम के बदलाव और वर्षा की संभावना के बारे में भी संकेत देता है।

व्यवसाय और नए उद्यम में

नया व्यवसाय शुरू करना, दुकान का उद्घाटन, नई गाड़ी खरीदना, घर में प्रवेश (गृह प्रवेश), जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त – इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। मिथिला पंचांग में इन सभी कार्यों के लिए विशेष मुहूर्त दिए जाते हैं।

मिथिला पंचांग का उपयोग कैसे करें? (How to Use Mithila Panchang)

पंचांग पढ़ना और समझना शुरुआत में थोड़ा कठिन लग सकता है, लेकिन कुछ बुनियादी बातें समझ लेने के बाद यह बहुत आसान हो जाता है। आइए जानते हैं कि मिथिला पंचांग को कैसे पढ़ें और इसका सही उपयोग कैसे करें:

Step 1: तिथि और वार की पहचान

सबसे पहले आपको यह देखना है कि आज की तिथि क्या है और कौन सा वार (दिन) है। पंचांग में तिथि हिंदी महीने के अनुसार लिखी होती है – जैसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, वैशाख कृष्ण अष्टमी आदि। याद रखें कि हिंदू कैलेंडर में दिन सूर्योदय से शुरू होता है, न कि मध्यरात्रि से।

Step 2: नक्षत्र और योग देखें

उसके बाद उस दिन कौन सा नक्षत्र और योग है, यह देखें। कुछ नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए विशेष अनुकूल होते हैं जैसे रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद। इसी प्रकार सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग बेहद शुभ माने जाते हैं।

Step 3: शुभ और अशुभ समय की जानकारी

पंचांग में राहु काल, यम घंटक, गुलिक काल और विष्टि करण (भद्रा) का समय स्पष्ट रूप से दिया होता है। इन समयों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इसके विपरीत, अभिजीत मुहूर्त (दोपहर का एक शुभ समय) और अमृत काल बेहद शुभ होते हैं।

Step 4: विशेष व्रत और त्योहार

यदि उस दिन कोई विशेष व्रत, त्योहार या पर्व है तो वह भी पंचांग में लिखा होता है। जैसे एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति आदि। व्रत के लिए पारण का सही समय भी पंचांग में दिया जाता है।

Step 5: ग्रह गोचर की जानकारी

मिथिला पंचांग में विभिन्न ग्रहों की स्थिति और उनके गोचर (transit) की भी जानकारी होती है। जैसे सूर्य किस राशि में है, चंद्रमा की स्थिति क्या है, गुरु-शनि-राहु-केतु कहां हैं। ये सभी जानकारियां ज्योतिषीय गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Digital युग में मिथिला पंचांग (Mithila Panchang in Digital Age)

आधुनिक युग में मिथिला पंचांग भी digital हो गया है। अब आप इसे विभिन्न रूपों में प्राप्त कर सकते हैं:

मोबाइल एप्लीकेशन

आजकल कई mobile apps उपलब्ध हैं जो मिथिला पंचांग की जानकारी प्रदान करते हैं। इन apps में daily panchang, festival calendar, muhurat, kundali matching जैसी सुविधाएं होती हैं। कुछ popular apps में ‘Mithila Panchang’, ‘Maithili Panchang’, ‘Hindu Calendar’ शामिल हैं।

वेबसाइट और ऑनलाइन पंचांग

कई websites मुफ्त में online Mithila Panchang provide करती हैं। आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से किसी भी दिन का पंचांग देख सकते हैं। ये websites regular updates और notifications भी भेजती हैं important festivals और muhurat के बारे में।

PDF और E-Book Format

पूरे साल का मिथिला पंचांग PDF format में भी download किया जा सकता है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी है जो traditional format में पंचांग पढ़ना पसंद करते हैं लेकिन printed copy नहीं रखना चाहते।

Printed Panchang

पारंपरिक printed Mithila Panchang आज भी बहुत लोकप्रिय है। हर साल नए साल की शुरुआत में नया पंचांग आता है जिसे लोग अपने घरों और दुकानों में रखते हैं। ये panchang किताब के रूप में या wall calendar के रूप में उपलब्ध होते हैं।

मिथिला पंचांग vs अन्य पंचांग (Comparison with Other Panchangs)

भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग पंचांग प्रचलित हैं। आइए देखें कि मिथिला पंचांग अन्य प्रमुख पंचांगों से कैसे अलग है:

मिथिला पंचांग vs विक्रम संवत पंचांग

विक्रम संवत पंचांग उत्तर भारत में सबसे अधिक प्रचलित है। जबकि दोनों ही पंचांग सूर्य-चंद्र आधारित हैं, मिथिला पंचांग की astronomical calculations अधिक precise होती हैं। मिथिला पंचांग विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र के लिए customized है जबकि विक्रम संवत एक general पंचांग है।

मिथिला पंचांग vs शक संवत पंचांग

शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है और सरकारी कामकाज में इसका उपयोग होता है। यह purely solar calendar है। मिथिला पंचांग luni-solar calendar है जो धार्मिक गतिविधियों के लिए अधिक उपयुक्त है क्योंकि हिंदू त्योहार और व्रत चंद्र तिथियों पर आधारित हैं।

मिथिला पंचांग vs तमिल पंचांगम

तमिल पंचांगम दक्षिण भारत में प्रचलित है। जहां मिथिला पंचांग में अमावस्या से माह शुरू होता है (अमांत पद्धति), वहीं कुछ क्षेत्रों में पूर्णिमा से माह शुरू होता है (पूर्णिमांत पद्धति)। दोनों की गणना पद्धति में भी कुछ अंतर हैं।

मिथिला पंचांग की विशिष्टता

मिथिला पंचांग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपने क्षेत्र के लिए specifically designed है। Local festivals, regional celebrations, और area-specific astronomical data इसमें शामिल हैं। यही कारण है कि मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए यह सबसे authentic और reliable पंचांग है।

महत्वपूर्ण शब्दावली (Important Terminology)

पंचांग को बेहतर तरीके से समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शब्दों को जानना आवश्यक है:

• राहु काल: यह प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे का एक अशुभ समय होता है जो राहु ग्रह के प्रभाव के कारण होता है। इस समय कोई नया या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

• यम घंटक: यह भी एक अशुभ समय होता है जो यमराज के प्रभाव से संबंधित है। महत्वपूर्ण कार्य इस समय टालने चाहिए।

• गुलिक काल: शनि ग्रह से संबंधित यह समय भी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

• भद्रा/विष्टि करण: यह करण अत्यंत अशुभ माना जाता है। इस समय कोई भी शुभ कार्य वर्जित है।

• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर के समय का यह लगभग 48 मिनट का period बेहद शुभ माना जाता है। इस समय कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।

• अमृत सिद्धि योग: यह एक अत्यंत शुभ योग है जो विशेष वार और नक्षत्र के संयोग से बनता है।

• पंचक: धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती – इन पांच नक्षत्रों को पंचक कहते हैं। इस समय कुछ विशेष कार्य नहीं करने चाहिए।

• अधिक मास (मलमास): लगभग हर तीन वर्ष में एक extra month होता है जिसे अधिक मास या मलमास कहते हैं। इस माह में शुभ कार्य नहीं किए जाते।

• क्षय तिथि और वृद्धि तिथि: कभी-कभी एक तिथि छूट जाती है (क्षय) या दो दिन एक ही तिथि रहती है (वृद्धि)। ऐसे में व्रत किस दिन करना है, यह पंचांग में स्पष्ट किया जाता है।

मिथिला पंचांग के लाभ (Benefits of Using Mithila Panchang)

नियमित रूप से मिथिला पंचांग का उपयोग करने से अनेक लाभ होते हैं:

1. धार्मिक जीवन में सुधार: पंचांग से आपको सभी महत्वपूर्ण व्रत, त्योहार और पूजा के दिनों की जानकारी मिलती है। इससे आप अपने धार्मिक जीवन को बेहतर तरीके से organize कर सकते हैं।

2. शुभ मुहूर्त का ज्ञान: जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों और कार्यों के लिए सही समय का चयन करना संभव हो जाता है।

3. अशुभ समय से बचाव: राहु काल, भद्रा आदि अशुभ समयों की जानकारी होने से आप इन समयों में महत्वपूर्ण कार्य करने से बच सकते हैं।

4. सांस्कृतिक जुड़ाव: पंचांग के नियमित उपयोग से आप अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते हैं।

5. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पंचांग astronomical calculations पर आधारित है, जो विज्ञान और परंपरा का सुंदर मेल है।

6. Planning में मदद: पूरे साल के त्योहार और महत्वपूर्ण दिनों की advance जानकारी होने से आप अपनी activities को बेहतर तरीके से plan कर सकते हैं।

मिथिला पंचांग कहां से प्राप्त करें? (Where to Get Mithila Panchang)

मिथिला पंचांग विभिन्न sources से प्राप्त किया जा सकता है:

• स्थानीय पुस्तक विक्रेता: मिथिला क्षेत्र में लगभग सभी किताबों की दुकानों पर मिथिला पंचांग उपलब्ध होता है।

• ऑनलाइन स्टोर: Amazon, Flipkart जैसे platforms पर printed panchang order किया जा सकता है।

• Mobile Apps: Google Play Store और Apple App Store पर कई Mithila Panchang apps उपलब्ध हैं।

• Websites: कई dedicated websites हैं जो free online Mithila Panchang provide करती हैं।

• धार्मिक स्थल: मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में भी पंचांग की जानकारी मिल जाती है।

मिथिला पंचांग उपयोग करते समय ध्यान देने योग्य बातें

• सही संस्करण चुनें: सुनिश्चित करें कि आप authentic और reliable publisher का पंचांग ही उपयोग करें।

• Regional variations: याद रखें कि मिथिला पंचांग specifically मिथिला region के लिए है। यदि आप किसी दूसरे क्षेत्र में हैं तो timings में थोड़ा अंतर हो सकता है।

• विशेषज्ञ की सलाह: महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मुहूर्त निकालते समय किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह लें।

• नियमित अभ्यास: पंचांग पढ़ना शुरुआत में मुश्किल लग सकता है, लेकिन नियमित अभ्यास से यह आसान हो जाता है।

• Update रहें: हर साल नया पंचांग लें क्योंकि तिथियां, मुहूर्त और खगोलीय स्थितियां बदलती रहती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

मिथिला पंचांग केवल एक calendar नहीं है – यह हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा का एक अमूल्य हिस्सा है। यह विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय है जो हमें सही समय पर सही कार्य करने में मदद करता है।

आधुनिक युग में भले ही हम digital calendars का उपयोग करते हों, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए मिथिला पंचांग आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसकी astronomical accuracy, detailed information और cultural relevance इसे अद्वितीय बनाते हैं।

चाहे आप शादी का मुहूर्त देख रहे हों, कोई धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हों, या फिर व्रत-त्योहार की तिथि जाननी हो – मिथिला पंचांग आपका सबसे विश्वसनीय मार्गदर्शक है। इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर आप न केवल अपने धार्मिक जीवन को समृद्ध करेंगे बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: मिथिला पंचांग और सामान्य पंचांग में क्या अंतर है?

उत्तर: मिथिला पंचांग विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र (बिहार और नेपाल के कुछ भाग) के लिए बनाया जाता है। इसकी astronomical calculations उस क्षेत्र की geographical location, longitude और latitude को ध्यान में रखकर की जाती हैं, जिससे सूर्योदय-सूर्यास्त, मुहूर्त आदि की timing बिल्कुल सटीक होती है। सामान्य पंचांग एक व्यापक area के लिए होता है जबकि मिथिला पंचांग region-specific है।

प्रश्न 2: क्या मिथिला पंचांग केवल मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए है?

उत्तर: जबकि मिथिला पंचांग मुख्य रूप से मिथिला क्षेत्र के लिए बनाया गया है, कोई भी इसका उपयोग कर सकता है। हालांकि, यदि आप किसी दूसरे क्षेत्र में रहते हैं तो सूर्योदय-सूर्यास्त और मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। ऐसे में अपने local पंचांग का भी संदर्भ लेना उचित रहता है।

प्रश्न 3: मिथिला पंचांग में राहु काल कैसे पता करें?

उत्तर: हर पंचांग में प्रतिदिन का राहु काल स्पष्ट रूप से लिखा होता है। यह प्रत्येक दिन अलग-अलग समय पर होता है और लगभग डेढ़ घंटे का होता है। आप daily panchang page पर इसे देख सकते हैं। Digital apps में तो यह automatically highlight होकर आता है।

प्रश्न 4: शादी के लिए मुहूर्त कैसे निकालें?

उत्तर: शादी जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए केवल पंचांग देखना पर्याप्त नहीं है। आपको एक अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए जो वर-वधू की कुंडली, नक्षत्र, गण, नाड़ी आदि की matching करके सबसे उपयुक्त तिथि और समय बताएगा। पंचांग इस process में एक महत्वपूर्ण tool है, लेकिन complete analysis के लिए expert guidance जरूरी है।

प्रश्न 5: क्या online Mithila Panchang विश्वसनीय है?

उत्तर: हां, अधिकांश reputed websites और apps द्वारा प्रदान किया गया online Mithila Panchang विश्वसनीय होता है। हालांकि, सुनिश्चित करें कि आप किसी authentic source का ही उपयोग करें। कुछ popular और reliable platforms हैं जो accurate information provide करते हैं। फिर भी, महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए printed panchang या expert consultation लेना बेहतर है।

प्रश्न 6: एकादशी व्रत के लिए कौन सी तिथि देखें?

उत्तर: पंचांग में एकादशी तिथि साफ-साफ लिखी होती है। कभी-कभी तिथि क्षय या वृद्धि की स्थिति होती है, ऐसे में पंचांग में यह भी बताया जाता है कि किस दिन व्रत करना है। व्रत खोलने का समय (पारण) भी पंचांग में दिया जाता है जो बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 7: भद्रा काल क्या होता है?

उत्तर: भद्रा काल को विष्टि करण भी कहते हैं। यह एक अत्यंत अशुभ समय माना जाता है जब कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। यह हर तिथि में अलग-अलग समय पर हो सकता है। पंचांग में भद्रा का समय स्पष्ट रूप से दिया जाता है।

प्रश्न 8: क्या मिथिला पंचांग mobile app में मिलता है?

उत्तर: हां, Google Play Store और Apple App Store दोनों पर कई Mithila Panchang apps उपलब्ध हैं। ये apps daily panchang, festivals, muhurat, alerts और notifications जैसी सुविधाएं provide करते हैं। कुछ apps offline भी काम करते हैं।

प्रश्न 9: अभिजीत मुहूर्त क्या है और यह कब होता है?

उत्तर: अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय का लगभग 48 मिनट का अत्यंत शुभ समय है। यह आमतौर पर दोपहर 12 बजे के आस-पास होता है। यह विशेष इसलिए है क्योंकि इस समय अधिकांश दोष नहीं लगते। आपातकालीन या जरूरी शुभ कार्यों के लिए यह समय बहुत अच्छा माना जाता है।

प्रश्न 10: मिथिला पंचांग किस भाषा में होता है?

उत्तर: पारंपरिक मिथिला पंचांग मैथिली भाषा में होता है, जो मिथिला की स्थानीय भाषा है। हालांकि, आधुनिक समय में हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में भी मिथिला पंचांग उपलब्ध हैं। Digital platforms पर आप अपनी पसंद की भाषा में पंचांग देख सकते हैं।

॥ शुभम् भवतु ॥

जय सीता राम | जय मिथिला

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